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निर्देशित लोकतंत्र – लोकतंत्र का संशोधित रूप

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इस आर्टिकल में लोकतंत्र के संशोधित रूप निर्देशित लोकतंत्र (Guided Democracy) के बारे में चर्चा की गई है।

निर्देशित लोकतंत्र क्या है

निर्देशित लोकतंत्र, लोकतंत्र का एक परिवर्तित या संशोधित रूप है जिसमें प्रतिनिधित्व के आधार पर परामर्श को विशेष महत्व दिया जाता है। निर्देशित लोकतंत्र का विचार इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्ण ने 1957 में दिया था। सुकर्ण ने तर्क दिया कि लोकतंत्र का पाश्चात्य स्वरूप ऐसे देशों के लिए ठीक नहीं होगा जिसमें साक्षरता और आर्थिक स्तर बहुत निम्न हो।

निर्देशित लोकतंत्र में लोकप्रिय नेता विभिन्न व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों से परामर्श करके अधिकांश निर्णय अपने विवेक से करता है।

नवोदित तथा साम्यवादी देशों में कई जगह निर्देशित लोकतंत्र या जनवादी लोकतंत्र जैसी व्यवस्थओं को प्रोत्साहन दिया जाता है। लोकतंत्र की उदारवादी तथा साम्यवादी धारणाओं के बीच की स्थिति में बुनियादी लोकतंत्र, निर्देशित लोकतंत्र या नियंत्रित लोकतंत्र जैसे लोकतंत्र विकसित हो गए है।

लोकतंत्र का यह प्रकार नवोदित राज्यों से संबंधित हैं जहां सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति तथा जनता के बौद्धिक स्तर के कारण इन देशों में न तो पाश्चात्य लोकतंत्र उपयुक्त सिद्ध हो पाता है और ना ही साम्यवादी लोकतंत्र।

इन देशों में लोकतंत्र का क्रियान्वयन जनता की सीमितता, निर्देशित या नियंत्रित अभिव्यक्ति के आधार पर होता है। इन देशों में राजनीतिक प्रक्रियाएं संक्रमण की अवस्था में होने के कारण लोकतंत्र अस्थायित्व के दौर से गुजर रहा है।

ऐसे देशों में लोकतंत्र तो स्थापित हो सकता है लेकिन निर्णय लेने एवं नेतृत्व का अधिकार कुछ ही लोगों का होता है। व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों से परामर्श तो किया जाता है लेकिन निर्णय प्रक्रिया में मतदान नहीं कराया जाता है। निर्णय लेने का अधिकार केवल शीर्ष नेतृत्व को ही होता है।

इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्ण का विचार था कि पश्चिमी लोकतंत्र वहीं सफल हो सकता है जहां व्यापक साक्षात्कार तथा समृद्धि होती है। इसलिए उसने इंडोनेशिया में यह प्रारूप सफल नहीं होने की बात कही। अतः उसने निर्देशित लोकतंत्र को उपयुक्त समझा।

सुकर्ण के साथ ही पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अयूब खान ने भी 1962 में निर्देशित लोकतंत्र को शीर्ष शक्ति के रूप में पेश किया था।

भारत की आजादी के शुरुआती दशकों में भारतीय लोकतंत्र विचारों के स्तर पर निर्देशित लोकतंत्र की श्रेणी में ही आता था।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. निर्देशित लोकतंत्र का विचार किसने दिया था?

    उत्तर : निर्देशित लोकतंत्र का विचार इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्ण ने 1957 में दिया था। सुकर्ण के साथ ही पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अयूब खान ने भी 1962 में निर्देशित लोकतंत्र को शीर्ष शक्ति के रूप में पेश किया था।

  2. निर्देशित लोकतंत्र क्या है?

    उत्तर : निर्देशित लोकतंत्र, लोकतंत्र का एक परिवर्तित या संशोधित रूप है जिसमें प्रतिनिधित्व के आधार पर परामर्श को विशेष महत्व दिया जाता है।

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About Mahender Kumar

My Name is Mahender Kumar and I do teaching work. I am interested in studying and teaching compititive exams. My education qualification is B. A., B. Ed., M. A. (Political Science & Hindi).

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